नई दिल्ली, July 5 : हेनले पासपोर्ट इंडेक्स हर साल दुनियाभर के देशों के पासपोर्ट की ताकत को रैंकिंग के जरिए दर्शाता है। इस इंडेक्स से यह पता चलता है कि किसी देश का पासपोर्ट धारक बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल कितने देशों की यात्रा कर सकता है। यह रैंकिंग इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों पर आधारित होती है।
2026 की रैंकिंग जारी
Henley Passport Index 2026 की ताजा रैंकिंग जारी कर दी गई है, जिसमें एक बार फिर दुनिया के मजबूत और कमजोर पासपोर्ट्स की तस्वीर सामने आई है।
दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट
2026 की रैंकिंग में सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले शीर्ष 10 देशों में एशिया के 9 देश शामिल हैं। इस सूची में केवल सोमालिया ही ऐसा देश है, जो अफ्रीका महाद्वीप से आता है। खास बात यह है कि इस लिस्ट में भारत के पड़ोसी देश—बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान भी शामिल हैं।
भारत की रैंकिंग में सुधार
इस साल भारत का पासपोर्ट 80वें स्थान पर पहुंच गया है। भारतीय नागरिक अब 55 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं। 2025 में भारत की रैंकिंग 85वीं थी, यानी इस बार भारत ने 5 स्थान की बढ़त हासिल की है। हालांकि, वैश्विक औसत के मुकाबले भारत अभी भी पीछे है और विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों से काफी दूर है।
कमजोर पासपोर्ट के नुकसान
कमजोर पासपोर्ट होने का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पड़ता है। अधिकतर देशों के लिए पहले से वीजा लेना जरूरी होता है, जिससे अचानक यात्रा करना मुश्किल हो जाता है।
वीजा प्रक्रिया में अपॉइंटमेंट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और लंबी प्रक्रिया शामिल होती है, जिसके चलते यात्रियों को महीनों पहले योजना बनानी पड़ती है। इसके अलावा वीजा फीस, दूतावास के चक्कर और अतिरिक्त कागजी कार्रवाई यात्रा की लागत को भी बढ़ा देते हैं।







