महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के बीपीओ यूनिट में कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन (धर्मांतरण) कराने के खुलासे ने देश भर में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में पुलिस, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) और खुद कंपनी स्तर पर जांच चल रही है। इसके साथ ही, लगातार हिंदू पक्ष इन गतिविधियों को लेकर आक्रोश और चिंता व्यक्त कर रहा है। टीसीएस का यह मामला पहला नहीं है। देश में इसके अलावा भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां हिंदू युवतियों के जबरन धर्मांतरण और शोषण की खबरें सामने आई हैं। आइए, देखते हैं विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों से जुड़े उपलब्ध आंकड़े क्या कहते हैं।
धर्मांतरण कानून?
भारत में धर्मांतरण से संबंधित कोई केंद्रीकृत आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कई राज्यों ने गैर-कानूनी धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून बनाए हैं। इन कानूनों के तहत दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारियों के आधार पर कुछ आंकड़े सामने आते हैं।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में ‘विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’ 27 नवंबर 2020 को लागू किया गया था। इसके लागू होने के बाद राज्य में जबरन धर्म परिवर्तन के कई मामले दर्ज किए गए। कानून लागू होने के शुरुआती एक महीने, यानी दिसंबर 2020 में, करीब 12 से 14 मामले दर्ज हुए थे। इसके बाद 2021 से 2023 के बीच उत्तर प्रदेश में कुल 427 मामले दर्ज किए गए। वहीं, जुलाई 2024 तक राज्य में धर्मांतरण के कुल मामलों की संख्या 835 से अधिक हो चुकी है।
गुजरात
गुजरात में ‘गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट’ (धर्म स्वतंत्रता अधिनियम) काफी पहले से लागू है, जिसे 2021 में और सख्त बनाया गया था। यदि गुजरात के आंकड़ों की बात करें, तो राज्य सरकार के अनुसार 2014 से 2019 के बीच धर्म परिवर्तन से जुड़े कुल 1,895 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा, गुजरात सरकार द्वारा अन्य कोई आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
केरल
देश में केरल धर्म परिवर्तन, लव जिहाद और हिंदू युवतियों के शोषण जैसे मुद्दों को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है। वहीं, केरल सरकार ने विधानसभा में 2006 से 2012 के बीच धर्मांतरण से जुड़े मामलों के आंकड़े पेश किए थे, जिनके अनुसार इस अवधि में कुल 7,713 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा, 2021 से 2025 के बीच केरल में ऐसे 1–2 मामले दर्ज किए गए हैं।
देश में धर्मांतरण को लेकर किसी प्रकार का आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई मामले दर्ज नहीं हो पाते हैं। नासिक के बाद अमरावती से जिस तरह हिंदू युवतियों के मुस्लिम युवकों द्वारा यौन शोषण के मामले सामने आए हैं और आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, उसने इस मुद्दे को और हवा दे दी है। वहीं, इन तीनों राज्यों के अलावा अन्य किसी भी राज्य सरकार की ओर से कोई डेटा जारी नहीं किया गया है, जो इस मुद्दे पर उनकी गंभीरता को लेकर सवाल खड़े करता है।







