
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने करीब 50 मिनट के संबोधन में मोदी सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, बांग्लादेश के साथ अमेरिका के संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने सरकार को घेरा, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला।
ट्रेड डील पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “सरेंडर” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील से भारत के कृषि, टेक्सटाइल और ऊर्जा क्षेत्रों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अमेरिका का टैरिफ 3 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि भारत ने अपने बाजार के कई हिस्सों में अमेरिकी कंपनियों को अधिक पहुंच दी है। राहुल गांधी का आरोप था कि सरकार ने किसानों के हितों की अनदेखी की है और कृषि क्षेत्र को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोल दिया है।
‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र, सदन में बढ़ा विवाद
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने अमेरिकी के जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि एक भारतीय उद्योगपति का नाम ‘एपस्टीन फाइल्स’ में है और इस आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें एपस्टीन से किसने मिलवाया, यह सवाल सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि एक व्यापारी जेल में क्यों नहीं हैं? वजह यह है कि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। मैं हरदीप पुरी से भी पूछना चाहूंगा कि उन्हें एपस्टीन से किसने मिलवाया।”
हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई और इसे निराधार बताया गया। सदन में इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ।
“भारत माता को बेच दिया”
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार देश के आर्थिक हितों से समझौता कर रही है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “क्या आपको इंडिया बेचने में शर्म नहीं आती? आपने हमारी मां को बेच दिया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में फैसले ले रही है और इससे देश की संप्रभुता प्रभावित हो सकती है।
बांग्लादेश-पाकिस्तान का संदर्भ और टेक्सटाइल सेक्टर की चिंता
राहुल गांधी ने अमेरिका-बांग्लादेश संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया। हाल के घटनाक्रमों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक मसौदे सार्वजनिक हुए हैं, जिनमें अमेरिकी बाजार को बांग्लादेशी टेक्सटाइल सेक्टर के लिए अधिक खुला करने की बात सामने आई है।
राहुल गांधी का तर्क था कि यदि अमेरिका बांग्लादेशी वस्त्र उत्पादों को व्यापक बाजार पहुंच देता है, तो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग-जो पहले ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा और लागत दबाव से जूझ रहा है-को नुकसान हो सकता है।
पाकिस्तान का संदर्भ देते हुए उन्होंने क्षेत्रीय रणनीति और अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति पर भी सवाल उठाए, हालांकि इस पर विस्तृत चर्चा हंगामे के कारण नहीं हो सकी।
राजनीतिक संदेश और आगे की रणनीति
राहुल गांधी का यह भाषण आगामी चुनावी परिदृश्य और आर्थिक मुद्दों को केंद्र में लाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। जहां कांग्रेस सरकार को ‘आर्थिक आत्मसमर्पण’ के आरोपों में घेर रही है, वहीं सरकार की ओर से इन दावों को भ्रामक और राजनीतिक बताया जा रहा है।
संसद में उठे ये मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकते हैं—खासकर तब, जब वैश्विक व्यापार, टैरिफ और भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।








