रायपुर। छत्तीसगढ़ के मतदाताओं के लिए एक बड़ी खबर है। राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का दूसरा चरण शुरू हो गया है। 4 नवंबर से BLO (बीएलओ) आपके घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस दौरान वे यह जांच करेंगे कि आपका नाम मतदाता सूची (Voter List) में सही तरह से दर्ज है या नहीं।
अगर आपका नाम 2003 की एसआईआर सूची में पहले से मौजूद है, तो आपको कोई दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी। आपका नाम नई वोटर लिस्ट में अपने आप शामिल कर लिया जाएगा।
लेकिन, अगर 2003 में आप 18 साल के नहीं थे या किसी दूसरे जिले या राज्य में रह रहे थे, तो घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आप या आपके माता-पिता का नाम 2003 की किसी भी राज्य की वोटर लिस्ट में है, तो भी आपको दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, यदि 2003 की सूची में आपका या आपके माता-पिता का नाम नहीं है, तो आपको अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कुछ दस्तावेज दिखाने होंगे।
जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट
चुनाव आयोग ने ऐसे 13 दस्तावेज तय किए हैं जिनमें से कोई एक दिखाकर आप अपना नाम नई मतदाता सूची में शामिल करा सकते हैं:
- केंद्र या राज्य सरकार/पीएसयू का पहचान पत्र या पेंशन आदेश
- 1 जुलाई 1987 से पहले सरकारी अथवा बैंक/डाकघर/एलआईसी द्वारा जारी पहचान पत्र
- जन्म प्रमाणपत्र
- पासपोर्ट
- मैट्रिक या शैक्षणिक प्रमाणपत्र
- राज्य प्राधिकरण द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र
- वन अधिकार प्रमाणपत्र
- जाति प्रमाणपत्र (OBC/SC/ST)
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) प्रमाणपत्र
- फैमिली रजिस्टर
- भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र
- आधार कार्ड ( चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू )
कितने दिन चलेगी प्रक्रिया ?
SIR प्रक्रिया के तहत एक महीने तक घर-घर सर्वे चलेगा। इसके बाद एक महीने तक दावा-आपत्ति की सुनवाई होगी और फिर अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) जारी की जाएगी। अगर इस प्रक्रिया में आपका नाम गलती से कट जाता है, तो आप पहले कलेक्टर और फिर मुख्य निर्वाचन कार्यालय में अपील कर सकते हैं।
क्या है SIR प्रक्रिया?
SIR (Special Intensive Revision) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण — मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया है। देश में यह अब तक 1951 से 2004 के बीच आठ बार किया गया था। आखिरी बार यह 2004 में हुआ था और अब 21 साल बाद दोबारा शुरू किया जा रहा है।
इस प्रक्रिया के जरिए उन वोटरों के नाम हटाए जाते हैं—
- जिनकी मृत्यु हो चुकी है,
- जो स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो गए हैं,
- जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं,
- जिन्होंने फर्जी वोटर कार्ड बनवा रखे हैं,
- या जो विदेशी नागरिक हैं।
क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?
लंबे समय से वोटर लिस्ट में त्रुटियां और फर्जी नाम बने हुए थे। इसलिए अब चुनाव आयोग ने देशभर में SIR प्रक्रिया शुरू की है ताकि वोटर लिस्ट को पूरी तरह शुद्ध और अपडेट किया जा सके। पहले चरण में यह प्रक्रिया बिहार में पूरी की जा चुकी है। दूसरे चरण में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्यों में इसे लागू किया जा रहा है।
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